रिर्पोट:- गोपाल निर्मलकर 

दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्रामीण क्षेत्र खोपली से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक अनाथ बुजुर्ग महिला, जिसका जीवन यापन केवल उसके खेत पर निर्भर था, उसे योजनाबद्ध तरीके से ठगी और कथित जालसाजी का शिकार बनाया गया।ग्रामीणों के अनुसार, महिला की जमीन को फर्जी दस्तावेज़ी प्रक्रिया के जरिए बेच दिया गया। आरोपों में यह बात भी सामने आई है कि भिलाई के मैत्री कुंज क्षेत्र से जुड़े अभिषेक वर्मा और एक महिला द्वारा कथित रूप से पूरे प्रकरण को अंजाम दिया गया। कहा जा रहा है कि रजिस्ट्री के दौरान किसी अन्य व्यक्ति को खड़ा कर जमीन अपने नाम करा ली गई, जिससे यह मामला साधारण विवाद नहीं बल्कि संगठित धोखाधड़ी जैसा प्रतीत होता है।सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों ने दस्तावेज़ों की जांच क्यों नहीं की? क्या सत्यापन केवल कागजों तक सीमित रह गया है? यदि एक असहाय बुजुर्ग महिला की जमीन इतनी आसानी से स्थानांतरित हो सकती है, तो फिर आम नागरिक किस व्यवस्था पर भरोसा करे?यह घटना केवल एक महिला के साथ अन्याय नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुस्ती, दस्तावेज़ सत्यापन की कमजोरी और जिम्मेदार तंत्र की निष्क्रियता का आईना है। राजस्व विभाग, पंजीयन कार्यालय और स्थानीय प्रशासन — सभी की भूमिका इस पूरे प्रकरण में सवालों के घेरे में है। यदि प्रारंभिक जांच में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों पर भी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।शासन से सीधी मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष, समयबद्ध और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। पीड़ित महिला को तत्काल कानूनी संरक्षण, जमीन की स्थिति पर रोक और न्यायिक सहायता प्रदान की जाए। साथ ही, दोषियों पर केवल कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि कड़ी दंडात्मक प्रक्रिया लागू हो, ताकि भविष्य में कोई भी असहाय व्यक्ति इस तरह की ठगी का शिकार न बने।
अब यह प्रशासन के सामने परीक्षा की घड़ी है — क्या व्यवस्था एक बुजुर्ग की आह सुन पाएगी, या फिर फाइलों के ढेर में न्याय दम तोड़ देगा? जनता जवाब चाहती है, कार्रवाई चाहती है, और सबसे बढ़कर — न्याय चाहती है।

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