मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप ने बालाघाट जिले की बिरसा तहसील में अवैध रूप से संचालित भव्या पैथोलॉजी लैब एवं एडवांस पैथोलॉजी लैब कलेक्शन सेंटर को बंद करते हुए पैथोलॉजी के संचालक श्री ढालसिंह चौधरी को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. उपलप ने बताया कि जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. रित्विक पटेल के नेतृत्व में गठित जांच दल ने 8 मार्च 2026 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिरसा के पास दुर्गा मंदिर कॉम्प्लेक्स, वार्ड क्रमांक 21 में स्थित उक्त पैथोलॉजी लैब का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि लैब का संचालन ढालसिंह चौधरी द्वारा किया जा रहा है, जबकि मौके पर वे स्वयं उपस्थित नहीं थे। लैब में केवल दो प्रशिक्षणार्थी मौजूद मिलीं, जिन्होंने बताया कि संचालक की योग्यता डीएमएलटी है, लेकिन निरीक्षण के दौरान उनकी शैक्षणिक योग्यता या मध्यप्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल में पंजीयन से संबंधित कोई प्रमाण-पत्र प्रदर्शित नहीं पाया गया। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि लैब में डॉ. विकास बिसेन की एमबीबीएस एवं अस्थि रोग से संबंधित डिग्री की प्रति प्रदर्शित थी, जबकि उनके द्वारा यहां सेवाएं देने संबंधी कोई अनुबंध या सहमति पत्र उपलब्ध नहीं मिला। साथ ही लैब के बाहर एडवांस पैथोलॉजी लैब के कलेक्शन सेंटर का बोर्ड लगा पाया गया, लेकिन इसके संबंध में भी कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। निरीक्षण में लैब के भीतर सीबीसी मशीन, बायोकेमिकल एनालाइजर, सेंट्रीफ्यूज मशीन, कंप्यूटर, प्रिंटर सहित विभिन्न जांच उपकरण तथा कई प्रकार की टेस्ट किट और रिएजेंट भी पाए गए। इसके अलावा लैब से निकलने वाले बायो-मेडिकल वेस्ट को परिसर के पीछे खुले में जलाकर नष्ट किया जाना पाया गया, जो निर्धारित नियमों के विपरीत है। डॉ. उपलप ने बताया कि नियमों के अनुसार पैथोलॉजी परीक्षण की रिपोर्टिंग केवल वही व्यक्ति कर सकता है, जिसके पास पैथोलॉजी विषय में स्नातकोत्तर उपाधि या डिप्लोमा हो तथा जो मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद में विधिवत पंजीकृत हो। निरीक्षण के दौरान इन प्रावधानों का पालन नहीं पाए जाने पर जांच दल ने जनहित में निर्णय लेते हुए भव्या पैथोलॉजी लैब एवं एडवांस पैथोलॉजी लैब कलेक्शन सेंटर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। प्रशासन द्वारा संचालक को नोटिस जारी कर निर्देशित किया गया है कि वह सात दिवस के भीतर अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत करें। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। KI Post navigation मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से स्वदेश लौटे जैन परिवार ने जताया आभार जल महोत्सव के तहत मोहगांव खुर्द में स्वच्छता एवं जागरूकता अभियान