BALAGHATबालाघाट जिले के वन क्षेत्र में मानवता और वन्यजीव संरक्षण की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली, जहां एक घायल तेंदुए को न केवल बचाया गया, बल्कि उपचार के बाद सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ दिया गया।

घटना 13 मार्च 2026 की है, जब वन परिक्षेत्र बालाघाट सामान्य की बीट आगरवाड़ा अंतर्गत ग्राम बीजाटोला के पास नहर किनारे एक तेंदुए के घायल होने की सूचना वन विभाग को प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए बचाव कार्य शुरू किया। वनसंरक्षक गौरव चौधरी एवं वनमंडल अधिकारी नित्यानंदम एल. के निर्देशन में, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक से अनुमति प्राप्त कर विशेषज्ञ टीम को मौके पर भेजा गया। रेस्क्यू अभियान में नानाजी देशमुख वन्यप्राणी पशुचिकित्सा विश्वविद्यालय की पशुचिकित्सक टीम का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। टीम ने घायल तेंदुए का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उसे उपचार हेतु मुक्की रेस्क्यू सेंटर भेज दिया था।

कुछ दिनों तक चले उपचार के बाद तेंदुए की स्थिति में सुधार हुआ और विशेषज्ञ पशुचिकित्सकों द्वारा उसे पूर्णतः स्वस्थ घोषित करते हुए फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया गया। इसके बाद 24 मार्च को वन विभाग, पशुचिकित्सकों एवं कान्हा टाइगर रिजर्व के स्टाफ की मौजूदगी में तेंदुए को मानव व्यवधान से दूर एक सुरक्षित आरक्षित वन क्षेत्र में सफलतापूर्वक छोड़ दिया गया। यह पूरी कार्रवाई वन विभाग की सजगता, विशेषज्ञों के समन्वय और वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस प्रयास से न केवल एक वन्यजीव का जीवन बचाया गया, बल्कि जैव विविधता संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।

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