Post navigation रायपुर साहित्य उत्सव में ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’ सत्र बना वैचारिक मंथन का केंद्र आज जब ज़्यादातर शादियाँ दिखावे और भव्य आयोजनों तक सीमित हो गई हैं, तब शेखर शेजुल और ऋतुजा शिंदे ने यह साबित कर दिया कि सादगी ही असली समृद्धि है।